हारबिंजर 2025 - भारतीय रिज़र्व बैंक का चौथा वैश्विक हैकथॉन
प्रस्तावना
हैकथॉन एक ऐसा कार्यक्रम है जो समस्या विवरणों के माध्यम से विनिर्दिष्ट क्षेत्र में मौजूदा चुनौतियों के लिए नवोन्मेषी समाधानों के विकास हेतु लोगों और संस्थाओं को एक साथ लाने के लिए आयोजित किया जाता है। हैकथॉन की सीमित अवधि के दौरान समस्या विवरणों पर प्रतिभागियों द्वारा काम किया जाता है, जिनमें हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर और कोडिंग समुदाय के व्यक्ति, दल, संस्थाएं शामिल हैं। तथापि प्रतिभागी इन्हीं तक सीमित नहीं हैं। हैकथॉन की कार्य-प्रणाली एक प्रतिस्पर्धी कार्यक्रम है जहां प्रतिभागी विचार प्रस्तुत करते हैं, समाधान तैयार करते हैं, आदिप्ररूप (प्रोटोटाइप) प्रदर्शित करते हैं। एक विशिष्ट पैनल द्वारा समाधानों का मूल्यांकन कर, हैकथॉन के विजेता/ विजेताओं का चयन किया जाता है। ये समाधान मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी संचालित एवं नवोन्मेषी होते हैं जिन्हें मौजूदा प्रक्रियाओं को परिष्कृत करने के लिए आयोजकों द्वारा उपयोग में लाया जा सकता है या बढ़ावा दिया जा सकता है।
हारबिंजर 2025 के बारे में
वित्तीय परिदृश्य एक परिवर्तनकारी बदलाव के दौर से गुज़र रहा है, जो फिनटेक नवोन्मेषों के अभिसरण और उभरती प्रौद्योगिकियों को तेज़ी से अपनाने से प्रेरित है। यह बदलाव पारंपरिक बैंकिंग मॉडलों को नया रूप प्रदान कर रहा है, और सुरक्षित, समावेशी और पहचान-संचालित समाधानों पर महत्ता प्रदान कर रहा है। ग्राहक ऑनबोर्डिंग से लेकर शिकायत निवारण तक, वित्तीय सेवाएँ न केवल अधिक कुशल और व्यक्तिगत बन रही हैं, बल्कि अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय भी बन रही हैं।
हारबिंजर 2025 "सुरक्षित बैंकिंग: पहचान, अखंडता और समावेशिता द्वारा संचालित" विषय पर केंद्रित है। इस हैकथॉन का उद्देश्य नवीन, सुरक्षित और उपयोगकर्ता-केंद्रित वित्तीय समाधान तैयार करने के लिए उभरती हुई तकनीकों का लाभ उठाना है जो ग्राहकों की पहचान की रक्षा करते हैं, विश्वास को बढ़ावा देते हैं, ग्राहक सुरक्षा बढ़ाते हैं, प्रणाली-व्यापी दक्षता में सुधार करते हैं और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देते हैं। प्रतिभागियों को ऐसे समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जो ग्राहक सुरक्षा और अनुभव को बेहतर बनाएँ, जटिल बैंकिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाएँ और पहुँच संबंधी कमियों का समाधान करें, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बैंकिंग का भविष्य न केवल जुड़ा हुआ और सुविधाजनक हो, बल्कि सभी के लिए सुरक्षित और समतापूर्ण भी हो। प्रतिभागियों को वित्तीय परिदृश्य के तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों को संबोधित करने के लिए रचनात्मक तकनीक-संचालित समाधानों पर विचार करने, प्रोटोटाइप करने और निर्माण करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
समस्या विवरण:
हारबिंजर 2025 समस्या कथनों के लिए नवीन विचारों को आमंत्रित करता है, जिनका विवरण निमन्वत है:
समस्या विवरण 1: टोकनयुक्त “अपने ग्राहक को जाने” (केवाईसी) (टोकेनाइज्ड केवाईसी)
वर्तमान में तेज़ी से विकसित हो रहे डिजिटल वित्तीय पारितंत्र में, वित्तीय समावेशन, विश्वास को बढ़ावा देने, सत्यनिष्ठा बनाए रखने और ग्राहकों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए एक सहज, सुरक्षित और उपयोगकर्ता-केंद्रित "अपने ग्राहक को जानें" (केवाईसी) अनुभव सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। वर्तमान केवाईसी प्रक्रियाओं (ऑनबोर्डिंग और आवधिक अद्यतन) को और अधिक परिष्कृत करके उन्हें और अधिक सहज और सुलभ बनाया जा सकता है, इसके साथ ही सत्यनिष्ठा और पहचान धोखाधड़ी जैसे खतरों का भी समाधान किया जा सकता है।
टोकनयुक्त केवाईसी पहचान प्रबंधन की पुनर्कल्पना करने का एक परिवर्तनकारी अवसर प्रस्तुत करता है जिसे वित्तीय संस्थानों के साथ आसानी से साझा किया जा सकता है और तुरंत सत्यापित किया जा सकता है। उपयोगकर्ताओं को अपनी सत्यापित पहचान को पुन: प्रयोज्य डिजिटल टोकन के रूप में सुरक्षित रूप से संग्रहीत, नियंत्रित और साझा करने में सक्षम बनाकर, यह दोहराव को कम कर सकता है, संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा कर सकता है, गोपनीयता को बढ़ावा दे सकता है, अनुपालन सुनिश्चित कर सकता है और वित्तीय सेवाओं के वितरण को सुव्यवस्थित कर सकता है। टोकनयुक्त केवाईसी मॉडल यह सुनिश्चित करते हैं कि एक बार उपयोगकर्ता की पहचान सत्यापित हो जाने के पश्चात, सहमति-संचालित तंत्रों के माध्यम से वित्तीय सेवा प्रदाताओं में इसका सुरक्षित रूप से पुन: उपयोग किया जा सकता है। यह समस्या विवरण प्रतिभागियों को एक टोकनयुक्त केवाईसी मॉडल डिज़ाइन और विकसित करने और निम्नलिखित विशेषताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए आमंत्रित करता है:
क. टोकन-आधारित उपयोगकर्ता-संचालित केवाईसी मॉडल बनाना जहाँ क्रेडेंशियल्स, भरोसेमंद जारीकर्ताओं द्वारा डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित हों और विभिन्न संस्थानों में सुरक्षित रूप से साझा किए जाएँ।
ख. डिजिटल पहचान टोकन छेड़छाड़-रहित, मशीन-पठनीय और विश्वसनीय प्राधिकारियों द्वारा जारी किए जाने चाहिए और कई ऑनबोर्डिंग प्रक्रियाओं में पुन: प्रयोज्य होने चाहिए।
ग. उपयोगकर्ताओं का अपने केवाईसी डेटा पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए। डेटा साझाकरण स्पष्ट रूप से सहमति-संचालित और ऑडिट योग्य होना चाहिए।
घ. पहचान क्रेडेंशियल्स छेड़छाड़-प्रतिरोधी, पता लगाने योग्य होने चाहिए और आवश्यकता के आधार पर सूचना के चयनात्मक प्रकटीकरण का समर्थन करने वाले होने चाहिए।
ङ. खुले मानकों, मानकीकृत एपीआई और सामान्य डेटा विनिमय प्रोटोकॉल का उपयोग करके क्रॉस-प्लेटफ़ॉर्म और अंतर-संस्थागत इंटरऑपरेबिलिटी को अस्तित्व में लाना।
च. वर्तमान में लागू एवं सक्रिय गोपनीयता दिशानिर्देशों का पालन करना।
छ. बेहतर जीवनचक्र प्रबंधन के लिए वास्तविक समय में केवाईसी का निरस्तीकरण, नवीनीकरण और ऑडिट ट्रैकिंग तंत्र।
ज. आधार, डिजिलॉकर और केंद्रीय केवाईसी रजिस्ट्री (सीकेवाईसीआर) जैसे मौजूदा बुनियादी ढाँचे के साथ एकीकरण/इंटरऑपरेबल योग्य बनाना, और सामान्य मानक एपीआई के माध्यम से विभिन्न संस्थानों में कार्य करना।
झ. आवश्यकता पड़ने पर कानूनी उत्तराधिकारियों, अभिभावकों या नामितियों को टोकनयुक्त केवाईसी पहुँच का सुरक्षित हस्तांतरण।
ञ. पते का अद्यतनीकरण, आवधिक केवाईसी अद्यतनीकरण और बीमा, म्यूचुअल फंड जैसे अन्य क्षेत्रों द्वारा केवाईसी प्लेटफॉर्म का लाभ कैसे उठाया जा सकता है, इस पर ध्यान केंद्रित करना।
यह समाधान ब्लॉकचेन, शून्य-ज्ञान प्रमाण (ज़ेडकेपी), स्मार्ट अनुबंध और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण जैसी उभरती हुई तकनीकों का लाभ उठाकर विश्वास को अधिक सक्षम करने, धोखाधड़ी को कम करने और परिचालन दक्षता में सुधार करने हेतु सहायता प्रदान कर सकते हैं। टोकनयुक्त केवाईसी में भारत में डिजिटल पहचान और ग्राहक ऑनबोर्डिंग में क्रांति लाने की क्षमता है। इसका उद्देश्य एक मापनीय, मानक-संचालित पहचान सत्यापन रूपरेखा तैयार करना है जो संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ाए, अतिरेक को कम करे और उपयोगकर्ताओं को उनकी डिजिटल पहचान पर अधिक नियंत्रण के साथ सशक्त बनाए। उपयोगकर्ताओं को केंद्र में रखकर और विनियामक संरेखण सुनिश्चित करके, टोकनयुक्त केवाईसी भारत के डिजिटल पहचान परिदृश्य को नया रूप दे सकता है और बड़े पैमाने पर सुरक्षित एवं सुविधाजनक वित्तीय पहुँच को गति प्रदान कर सकता है।
समस्या कथन 2: ऑफ़लाइन केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) (e₹)
डिजिटल रुपया भौतिक नकदी के डिजिटल रूप के रूप में परिकल्पित है। इसकी ऑफ़लाइन कार्यक्षमता e₹ के डिज़ाइन के मूलभूत विचारों में से एक है। व्यापक उपयोग सुनिश्चित करने के अतिरिक्त, ऑफ़लाइन लेनदेन दूरस्थ स्थानों में भी लाभदायक होंगे और उन स्थानों पर पहुँच प्रदान करेंगे जहाँ मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। प्रतिभागियों को ऑफ़लाइन केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) लेनदेन को सक्षम करने के लिए एक सुरक्षित, उपयोगकर्ता-अनुकूल, छेड़छाड़-प्रतिरोधी और स्केलेबल समाधान डिज़ाइन करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। समाधान को वास्तविक समय में इंटरनेट या दूरसंचार कनेक्टिविटी की आवश्यकता के बिना खुदरा सीबीडीसी लेनदेन की अनुमति प्रदान करनी चाहिए, जिससे कम संसाधन वाले वातावरण में दोहरे खर्च की रोकथाम और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके। हमारा लक्ष्य एक कार्यात्मक ऑफ़लाइन सीबीडीसी समाधान का निर्माण करना है जो आम जनों को और व्यापारियों को इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क के बिना सीबीडीसी लेनदेन करने की अनुमति प्रदान करता है। इस समाधान में निम्नलिखित बातें शामिल होनी चाहिए:
क. वास्तविक समय में सर्वर सत्यापन की आवश्यकता के बिना दोहरे खर्च की रोकथाम।
ख. लगातार ऑफ़लाइन भुगतान की अनुमति प्रदान करना, अर्थात जिससे ऑफ़लाइन मोड में प्राप्त धनराशि को ऑफ़लाइन मोड में खर्च भी किया जा सके।
ग. कम लागत वाले उपकरणों पर कार्य करें, अर्थात केवल एनएफसी/मोबाइल सुरक्षित तत्वों पर निर्भर न रहें। समाधान सभी प्रकार के उपकरणों/ओईएम और संचार प्रोटोकॉल से स्वतंत्र होना चाहिए और विभिन्न फॉर्म फैक्टर पर सक्षम किया जा सकता है।
घ. सभी फॉर्म फैक्टर, वॉलेट और भारत में उपलब्ध विभिन्न स्वीकृति उपकरणों पर ओईएम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इंटरऑपरेबल होना चाहिए।
ड़. सुरक्षित पी2पी प्रमाणीकरण और लेनदेन की अखंडता सुनिश्चित करें, जिसमें प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच पारस्परिक प्रमाणीकरण शामिल हो।
च. विनियामक अनुपालन और ग्राहक विवाद समाधान/शिकायत निवारण के लिए (गोपनीयता बनाए रखते हुए) ऑडिटेबिलिटी बनाए रखें।
छ. सभी निर्भरताओं को शामिल करें, उदाहरण के लिए, यदि आवश्यक हो, तो ओईएम/चिप निर्माताओं के साथ अनुमति/साझेदारी।
ज. भारत भर में बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन के लिए एक दृष्टिकोण योजना शामिल करें, जिसमें लागत और समयसीमा का अनुमान भी शामिल हो।
झ. ऐसे लेनदेनों के लिए प्रणाली, व्यक्ति/व्यापारी और बैंक स्तर पर समाधान रूपरेखा प्रदान करें।
ञ. मॉड्यूलर हो, अर्थात, ऑफ़लाइन तत्वों को मौजूदा सीबीडीसी प्रणाली/वास्तुकला में न्यूनतम सिस्टम-स्तरीय परिवर्तनों के बिना/के साथ आसानी से एकीकृत किया जा सके।
ट. यह मुख्यतः ओपन-सोर्स सॉफ़्टवेयर पर आधारित हो और कार्यान्वयन के लिए समाधान चुने जाने की स्थिति में स्रोत कोड साझा करने के लिए तैयार हो।
ठ. खोए/चोरी हुए उपकरणों की स्थिति में निरसन तंत्र।
ड. पंजीकरण के दौरान उपकरण बाइंडिंग के लिए सुरक्षित और छेड़छाड़-रोधी विधि प्रदान करें।
ढ. समाधान के लिए बहु-प्रोटोकॉल समर्थन प्रदान करें (एनएफ़सी, ब्लूटूथ, ध्वनि, आदि)
ण. यह सुनिश्चित करने के लिए उच्च स्तर की सुरक्षा प्रदान करें कि भुगतान क्रेडेंशियल डिवाइस पर किसी भी दुर्भावनापूर्ण व्यक्ति द्वारा एक्सेस नहीं किए जाने चाहिए, प्रमाण के रूप में इसका संदर्भ साझा किया जाना चाहिए।
त. उपकरण अखंडता, डेटा अखंडता और जोखिम सुरक्षा के उच्च स्तर को सुनिश्चित करें, प्रमाण के रूप में इसका संदर्भ साझा किया जाना चाहिए।
थ. छेड़छाड़ किए गए उपकरण का पता लगाने के लिए रैंडम फ़िंगरप्रिंट तकनीक प्रदान करें और उपकरण-आधारित ब्लैकलिस्टिंग करने की तकनीक प्रदान करें।
द. सुझाई गए समाधान सुविधाओं का प्रबंधन और स्वामित्व केवल समाधान प्रदाता के पास होना चाहिए और इसमें कोई तृतीय-पक्ष समाधान शामिल नहीं होना चाहिए।
समस्या कथन 3: विश्वास बढ़ाना
जैसे-जैसे वित्तीय पारितंत्र तेज़ी से डिजिटल होता जा रहा है, तकनीक का उपयोग वित्तीय सेवाओं में बदलाव लाने में नवोन्मेष को बढ़ावा देने के साथ-साथ उभरते जोखिमों से बचाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी भी बन रहा है। ग्राहक अब फ़िशिंग, पहचान की चोरी, डेटा उल्लंघन और अनधिकृत लेनदेन सहित साइबर खतरों की बढ़ती श्रृंखला के संपर्क में हैं। वित्तीय संस्थानों के सामने सिस्टम को सुरक्षित रखने और धोखाधड़ी वाली गतिविधियों से बचने की चुनौती भी है। इसके लिए ऐसे तकनीक-संचालित समाधानों को लागू करना ज़रूरी है जो सुविधा, गोपनीयता या वित्तीय समावेशन से समझौता किए बिना ग्राहकों की सुरक्षा को प्रभावी ढंग से बढ़ा सकें। वित्तीय संस्थानों के लिए प्रमुख चुनौतियाँ इस प्रकार हैं:
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पहचान धोखाधड़ी और प्रतिरूपण – डीपफेक का उपयोग करके, धोखेबाज चेहरों, आवाज़ों या यहां तक कि लाइव वीडियो कॉल्स की नकल करते हैं, जिससे पारंपरिक सत्यापन प्रणालियां कमजोर और अपर्याप्त हो जाती हैं। अन्य खतरों में बायोमेट्रिक स्पूफिंग और कार्यकारी/सी-सूट प्रतिरूपण शामिल हैं।
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नकली बैंकिंग और डिजिटल ऋण ऐप - ऐसे कई नकली बैंकिंग और डिजिटल ऋण ऐप हैं जो उपयोगकर्ताओं को संवेदनशील जानकारी देने, धन चुराने या कमज़ोर ग्राहकों को ऋण के जाल में फँसाने के लिए छल करते हैं। ये घटनाएँ डिजिटल वित्तीय सेवाओं में विश्वास को काफ़ी कम कर देती हैं।
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ग्राहक शिकायत निवारण – शिकायत समाधान यात्रा को स्वचालित, सुव्यवस्थित और बेहतर बनाने के लिए तकनीक का उपयोग करने की अपार संभावनाएं हैं। साथ ही, उपयुक्त तकनीक का उपयोग करक, वृद्ध नागरिकों, दिव्यांग व्यक्तियों और सीमित डिजिटल साक्षरता वाले व्यक्तियों जैसे कमजोर समूहों के लिए पहुंच में सुधार करने के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
प्रतिभागियों को ऐसे नवीन, प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान डिज़ाइन करने के लिए आमंत्रित किया जाता है जो ग्राहक सुरक्षा को बढ़ाएँ, डिजिटल वित्तीय अवसंरचना को मज़बूत करें, उपयोगकर्ता अनुभव में सुधार करें और प्रणालीगत सुरक्षा को बढ़ाएँ। समाधान निम्नलिखित में से किसी एक या सभी क्षेत्रों को संबोधित कर सकता है:
क. ऐसी प्रणालियाँ विकसित करें जो वीडियो/छवियों में डीपफेक, आवाज़ में हेरफेर, या जाली पहचान का उपयोग करके प्रतिरूपण के प्रयासों का पता लगा सकें। इसे ग्राहक ऑनबोर्डिंग के दौरान छेड़छाड़ किए गए दस्तावेज़ों को भी चिह्नित करना चाहिए और सी-सूट प्रतिरूपण धोखाधड़ी का पता लगाना चाहिए।
ख. एक ऐसा समाधान डिज़ाइन और विकसित करें जो ग्राहकों को धोखा देने से पहले अनधिकृत बैंकिंग/डिजिटल ऋण देने वाले ऐप्स की पहचान करे और उन्हें ब्लॉक करे। यह धोखाधड़ी के प्रयासों पर त्वरित और सक्रिय प्रतिक्रिया को सक्षम करने के लिए रीयल-टाइम अलर्ट उत्पन्न करने में सक्षम होना चाहिए। इसे पहचान क्षमताओं को मजबूत करते हुए ग्राहक गोपनीयता को बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया जाना चाहिए। इसमें ऐसी सुविधाएं भी शामिल हो सकती हैं जो ग्राहकों को इंस्टॉल करने से पहले ऐप्स की प्रामाणिकता की जांच करने की अनुमति दें, जिससे अनधिकृत ऐप्स के शिकार होने का जोखिम कम हो सके।
ग. एक बुद्धिमान और समावेशी, तकनीक-चालित शिकायत निवारण प्रणाली डिज़ाइन और विकसित करें। यह शिकायत संभालने के विभिन्न चरणों में प्रक्रियाओं को स्वचालित करे और मुड़ने के समय को कम करे, तथा नियंत्रित संस्थाओं को डेटा-आधारित बुद्धिमत्ता से सशक्त बनाए ताकि शिकायतों का समाधान किया जा सके। इसे स्वचालित रूप से शिकायतों को वर्गीकृत, प्राथमिकता देना और उपयुक्त चैनलों तक पहुँचाना चाहिए। इसे बार-बार होने वाली समस्याओं का पता लगाना चाहिए और जहाँ लागू हो, मानकीकृत प्रतिक्रियाओं को स्वचालित करना चाहिए।
प्रतिभागी या टीम अधिकतम तीन अलग-अलग समाधान प्रस्तुत कर सकते हैं, जिनमें से प्रत्येक प्रतिरूपण धोखाधड़ी, नकली ऐप्स और शिकायत निवारण से संबंधित चुनौतियों के लिए होगा। प्रत्येक समाधान को उस विशिष्ट चुनौती के साथ स्पष्ट रूप से संरेखित किया जाना चाहिए जिसका वह समाधान करता है और ग्राहक सुरक्षा बढ़ाने और सिस्टम-व्यापी दक्षता में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रदर्शित करना चाहिए। इन उप-विषयों में सर्वश्रेष्ठ समाधान को पुरस्कार के लिए विचार किया जाएगा।
आवेदन हेतु पात्रता?
सभी संस्थाएँ, टीमें या व्यक्ति (अठारह वर्ष और उससे अधिक आयु के) जो संविदात्मक समझौते में प्रवेश करने के पात्र हैं, आवेदन करने के पात्र हैं। इसके अतिरिक्त, उत्पाद/समाधान में नवोन्मेष या सर्वहितकारी प्रौद्योगिकी के नवीन अनुप्रयोग का तत्व होना चाहिए। सभी पृष्ठभूमि और भौगोलिक क्षेत्रों के प्रतिभागियों का स्वागत है, हालाँकि भारतीय वित्तीय सेवा बाजार और उपभोक्ताओं के बारे में जानकारी रखने वाले प्रतिभागियों को प्राथमिकता दी जाएगी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और उसकी सहायक संस्थाओं के कर्मचारी इसमें भाग लेने के पात्र नहीं हैं।
आवेदन कैसे करें?
हैकथॉन हारबिंजर 2025 भारतीय रिज़र्व बैंक के स्वामित्व का है और यह भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ही प्रायोजित किया गया है। इसे एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस एक्सचेंज (APIX) प्लेटफॉर्म पर होस्ट किया गया है। प्रतिभागी हैकाथॉन के लिए पंजीकरण करने और पंजीकरण के बाद प्रस्ताव जमा करने के लिए निम्नलिखित लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।
https://app.apixplatform.com/h1/harbinger2025
यह आवेदन केवल दिए गए लिंक के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएँगे। पंजीकरण के पश्चात, कृपया समस्या विवरण चुनें और प्लेटफ़ॉर्म पर अपना प्रस्ताव सबमिट करें। कृपया प्रस्ताव से संबंधित सभी प्रश्नों के उत्तर भरें।
यदि आप प्रत्येक श्रेणी में निर्धारित सभी मानदंडों को पूरा करते हैं, तो आप एक से अधिक समस्या विवरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। आपका समाधान एक से अधिक समस्या विवरण द्वारा कवर की गई आवश्यकताओं को पूरा करने का लक्ष्य रख सकता है। हम वांछित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव की विशिष्टता और व्यवसाय मॉडल की व्यवहार्यता पर विचार कर रहे हैं।
हारबिंजर 2025 तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा जिसमें प्रविष्टियों की छंटनी (स्क्रीनिंग) (फेज़ I), समाधान विकास के लिए प्रविष्टियों को चयनित करना (फेज़ II), और विजेताओं का मूल्यांकन और चयन (फेज़ III) शामिल हैं। पहले चरण में, सबसे आशाजनक समाधानों की छंटनी (स्क्रीनिंग) की जाएगी। चयनित संस्थाओं को दूसरे चरण में निर्णायकों के एक स्वतंत्र पैनल के समक्ष अपना प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा। चयनित संस्थाएँ समाधान विकास चरण (चरण II) के दौरान एक कार्यशील मॉडल या प्रोटोटाइप समाधान विकसित करने पर कार्य करेंगी। तीसरे चरण में अंतिम मूल्यांकन के दौरान, विजेताओं/उपविजेताओं का निर्णय करने के लिए एक स्वतंत्र निर्णायक मंडल द्वारा समाधानों का मूल्यांकन किया जाएगा। विजेताओं/उपविजेताओं का चयन कुछ मूल्यांकन मानदंडों के आधार पर किया जाएगा, जिनमें अन्य बातों के अतिरिक्त, समस्या विवरण की समझ, नवोन्मेष, समाधान की व्यापकता, कार्यान्वयन में सुलभता, प्रदर्शन/उपयोगकर्ता अनुभव, व्यवहार्यता, मापनीयता और अनुपालन आदि शामिल हैं।
प्रमुख तिथियाँ:
| चरण |
प्रारंभ |
समाप्त |
| पंजीकरण और प्रस्ताव प्रस्तुत करने की तिथि |
अक्तूबर 23, 2025 |
नवंबर 23, 2025 |
अन्य विवरण:
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प्रत्येक श्रेणी के समस्या विवरणों में एक विजेता और एक उपविजेता घोषित किया जाएगा।
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विजेताओं को 40 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। उपविजेताओं को ₹20 लाख की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
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तीनों समस्या कथनों में सर्वश्रेष्ठ 'महिला टीम' को ₹20 लाख रुपये की राशि का विशेष पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
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प्रोटोटाइप के विकास की लागत को पूरा करने के लिए समाधान विकास के लिए चयनित की गई टीमों को 5 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
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निर्णायकों को यह अधिकार सुरक्षित है कि वे उन प्रविष्टियों को अयोग्य घोषित कर सकें जो, उनके एकमात्र विवेक में, हैकाथॉन की भावना, नियमों या किसी लागू कानून का उल्लंघन करती हों।
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विजेता/उप विजेता के चयन तथा हारबिंजर से संबंधित अन्य सभी मामलों के संबंध में निर्णायकों का निर्णय अंतिम, बाध्यकारी एवं अपरिवर्तनीय होगा।
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भागीदारों की जिम्मेदारी है कि वे सुनिश्चित करें कि उनकी प्रस्तुतियां किसी भी तृतीय-पक्ष बौद्धिक संपत्ति अधिकारों, जैसे पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क आदि का उल्लंघन न करें, और इस संबंध में एक प्रतिज्ञा पत्र प्रस्तुत करें। ऐसे उल्लंघनों के कारण उत्पन्न किसी भी विवाद या दायित्व के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक उत्तरदायी नहीं होगा।
संपर्क करें:
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